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यूएचएस रोहतक की परीक्षा शुल्क वृद्धि के खिलाफ डीएमए इंडिया का मोर्चा,अधिसूचना वापस लेने की मांग

रोहतक/चंडीगढ़,07 जुलाई।* डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (UHSR), रोहतक द्वारा परीक्षा शुल्क में की गई भारी वृद्धि के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हरियाणा की माननीय स्वास्थ्य मंत्री कुमारी आरती सिंह राव तथा विश्वविद्यालय प्रशासन को विस्तृत ज्ञापन भेजकर अधिसूचना Endst. No./UHSR/Exam./Misc./2026/6763-70 को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।

*ज्ञापन डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास एवं राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी द्वारा भेजा गया, जिसमें परीक्षा शुल्क वृद्धि को छात्र विरोधी, अन्यायपूर्ण एवं आर्थिक रूप से शोषणकारी बताया गया है।*

डॉ व्यास ने कहा कि सरकारी संस्थान में परीक्षा शुल्क के नाम पर विद्यार्थियों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता। जब छात्र पहले से ही ट्यूशन फीस, हॉस्टल, पुस्तकें, परिवहन एवं अन्य शैक्षणिक खर्चों का वहन कर रहे हैं, तब इस प्रकार की भारी शुल्क वृद्धि हजारों मेडिकल विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी।

*डॉ. अमित व्यास, राष्ट्रीय अध्यक्ष, डीएमए इंडिया ने कहा—*
“सरकारी विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराना है, न कि उन्हें अत्यधिक शुल्क के बोझ तले दबाना। यदि परीक्षा शुल्क में इतनी बड़ी वृद्धि की जाती है तो विश्वविद्यालय को इसका पूरा वित्तीय औचित्य सार्वजनिक करना होगा। डीएमए इंडिया इस अन्यायपूर्ण निर्णय का हर लोकतांत्रिक मंच पर विरोध करेगी।”

*डॉ शुभ प्रताप सोलंकी,राष्ट्रीय महासचिव, डीएमए ने कहा—*
“विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाले इतने महत्वपूर्ण निर्णय बिना किसी पूर्व संवाद और परामर्श के लेना पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। शिक्षा अधिकार है, आर्थिक दंड नहीं।”

*डीएमए इंडिया की प्रमुख मांगें-*
1. परीक्षा शुल्क वृद्धि संबंधी अधिसूचना तत्काल प्रभाव से वापस ली जाए।
2. परीक्षा शुल्क में वृद्धि के वित्तीय एवं प्रशासनिक औचित्य को सार्वजनिक किया जाए।
3. भविष्य में विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाले किसी भी शुल्क संशोधन से पूर्व डीएमए इंडिया एवं छात्र प्रतिनिधियों से औपचारिक विचार-विमर्श किया जाए।
4. छात्र हितैषी, पारदर्शी, न्यायसंगत एवं किफायती शुल्क नीति लागू की जाए, जिससे किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा आर्थिक कारणों से प्रभावित न हो।

डीएमए इंडिया ने स्वास्थ्य मंत्री कुमारी आरती सिंह राव से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने तथा विश्वविद्यालय प्रशासन को परीक्षा शुल्क वृद्धि का निर्णय वापस लेने के निर्देश देने का आग्रह किया है।

“परीक्षा शुल्क में मनमानी वृद्धि केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि समान, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के अधिकार पर सीधा आघात है। छात्र हित सर्वोपरि हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

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लेखक✓ Verified Author

Sahab Ram

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