भिवानी, 16 जुलाई। स्थानीय दिनोद गेट स्थित अंचल अस्पताल में आयोजित गर्भ संस्कार में गीता का महत्व विषयक कार्यक्रम में तीन दिवसीय प्रवास पर भिवानी पहुंचे गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।
कार्यक्रम में संयोजक डॉ. अनीता अंचल, डॉ. विनोद अंचल एवं चिकित्सकों की टीम ने ज्ञानानंद महाराज का स्वागत किया। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं, महिला चिकित्सकों, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों तथा गीता प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अपने संबोधन में ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गर्भकाल केवल शारीरिक विकास का नहीं, बल्कि भावनात्मक, मानसिक और आध्यात्मिक संस्कारों का भी महत्वपूर्ण समय होता है। यदि गर्भस्थ शिशु को सकारात्मक वातावरण, श्रेष्ठ विचार और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे दिव्य ग्रंथों का प्रभाव मिलता है, तो वह आगे चलकर संस्कारवान, कर्मशील, बुद्धिमान और राष्ट्रभक्त नागरिक बन सकता है। उन्होंने कहा कि गीता जीवन की प्रत्येक समस्या का समाधान प्रदान करती है, इसलिए प्रत्येक परिवार में गीता का पाठ और अध्ययन होना चाहिए।
ज्ञानानंद महाराज ने बताया कि जीओ गीता की ओर से गर्भ संस्कार विषय पर आधारित विशेष गीता पुस्तक तैयार की जा रही है, जो शीघ्र ही समाज को समर्पित की जाएगी। यह पुस्तक गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करेगी, जिससे भावी पीढ़ी संस्कारों से समृद्ध बन सके।
उन्होंने अंचल अस्पताल द्वारा शुरू की गई गर्भ संस्कार में गीता का महत्व पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह समय की आवश्यकता है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक प्रेरणादायी प्रयास है।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अनीता अंचल एवं डॉ. विनोद अंचल ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान सकारात्मक सोच, श्रेष्ठ साहित्य और गीता के संदेश का प्रभाव माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों के मानसिक विकास में सहायक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक जीवन दृष्टि से जोड़ना है, ताकि आने वाली पीढ़ी संस्कारवान, जिम्मेदार और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाली बन सके। कहा कि गर्भ में बच्चे को गीता युक्त संस्कार मिलेंगे तो , वहीं संस्कारवान संतान राष्ट्र के भविष्य में मजबूती देगी।
इस अवसर पर पहुंचे जीओ गीता के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ मार्कण्डेय आहूजा ने कहा कि गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज के मार्गदर्शन व शुभ आशीर्वाद से गर्भ में गीता संस्कार पुस्तक जल्द तैयार की जाएगी, उन्होंने कहा गीता संस्कार बच्चों में जरूरी है।
इस मौके पर कार्यक्रम आयोजक डॉ विनोद अंचल, डॉ अनीता अंचल, गुरु जम्बेश्वर यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ नरसिंह बिश्नोई, पोजीआई रोहतक से विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, पीजीआई रोहतक से विभागाध्यक्ष डॉ. वाणी मल्होत्रा, नीमा हरियाणा के संरक्षक डॉ आर बी गोयल, नीमा भिवानी के प्रधान डॉ राजेश शर्मा, रोहतक से डॉ. राजेश जले, नीमा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ दिनेश गौड़, जींद से डॉ विजय पाल आर्य, रोहतक से डॉ धर्मपाल मुदगिल, हिसार से डॉ कुलदीप शर्मा, गुरुग्राम से डॉ मोहित कुमार ढींगरा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
गर्भ संस्कार से युक्त गीता की पुस्तक जल्द होगी तैयार: गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज









