×
Chaupal Tv
Haryana

जिला प्रशासन का जिला में झींगा पालन और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ा

रोहतक, 25 जून। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा जिला में झींगा पालन और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। जिला में मत्स्य पालन एवं झींगा पालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सचिन गुप्ता स्थानीय कैंप कार्यालय में मत्स्य पालन विभाग की मासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिला में मत्स्य एवं झींगा पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और आधुनिक तकनीकों तथा सरकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिला में 1,385 एकड़ क्षेत्र में मत्स्य पालन किया जा रहा है, जिसमें 105 लाख मछली बीज डाला गया है तथा वर्ष 2026-27 के दौरान पहली तिमाही में अब तक 807 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया है। जिला में एक सरकारी मत्स्य बीज फार्म तथा एक निजी हैचरी/रीयरिंग यूनिट कार्यरत है। इसके अलावा दो 25-टैंक क्षमता वाले बायोफ्लॉक यूनिट स्थापित किए गए हैं तथा 92.5 एकड़ क्षेत्र में झींगा पालन किया जा रहा है।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि जिला में कुल 368 मत्स्य पालक तथा 41 झींगा पालक सक्रिय हैं। इनके लिए कुल 654 तालाब उपलब्ध हैं, जिनमें 238 निजी भूमि के तालाब, 305 सामुदायिक तालाब तथा 111 झींगा पालन तालाब शामिल हैं। मत्स्य एवं झींगा पालकों को केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (सीआईएफई), लाहली तथा एक्वाकल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, हिसार द्वारा प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। झींगा बीज की आपूर्ति आंध्र प्रदेश की विभिन्न हैचरियों से की जाती है, जबकि फीड की व्यवस्था देश की प्रतिष्ठित कंपनियों के माध्यम से की जा रही है। जिला में उत्पादित झींगा को आंध्र प्रदेश एवं गुजरात की प्रोसेसिंग कंपनियां सीधे तालाब स्थल से खरीद रही हैं।
सचिन गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार की इंटेंसिव फिशरीज डेवलपमेंट प्रोग्राम, अनुसूचित जाति परिवार कल्याण योजना तथा केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के माध्यम से किसानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सघन मत्स्य विकास कार्यक्रम के तहत 1,200 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 510 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया, 625 लाख फिंगरलिंग के लक्ष्य के विरुद्ध 105 लाख बीज संचित किया गया, 10,700 मीट्रिक टन उत्पादन लक्ष्य के मुकाबले 807 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ, 4 हेक्टेयर तालाबों के नवीनीकरण लक्ष्य के विरुद्ध 8.20 हेक्टेयर क्षेत्र का नवीनीकरण किया गया, 5 हेक्टेयर इनपुट सहायता लक्ष्य के मुकाबले 11.05 हेक्टेयर क्षेत्र में सहायता प्रदान की गई।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि अनुसूचित जाति परिवारों के लिए विशेष सहायता के तहत प्रथम वर्ष की पट्टा राशि अनुदान योजना के अंतर्गत 17.6 हेक्टेयर तथा द्वितीय वर्ष में 5.8 हेक्टेयर क्षेत्र के मामलों को स्वीकृति हेतु निदेशालय भेजा गया है। इसके अतिरिक्त 7.8 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए इनपुट सहायता के प्रस्ताव भी भेजे गए हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नए तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, हैचरी स्थापना, आरएएस यूनिट, फिश कियोस्क, आइस बॉक्स युक्त वाहन तथा फीड मिल स्थापना पर सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 40 प्रतिशत तथा महिलाओं एवं अनुसूचित जाति वर्ग के लाभार्थियों को 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
सचिन गुप्ता ने कहा कि जलभराव एवं लवणीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता शिविर, समाचार पत्रों में प्रचार तथा भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस अवसर पर मंडल मृदा संरक्षण अधिकारी नीना सहवाग, कृषि उप निदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक, जिला उद्यान अधिकारी मदन लाल, जिला मत्स्य अधिकारी आशा हुड्डा, पशुपालन उप निदेशक डॉ. नरेंद्र दहिया, एसडीएओ संदीप सिंह, एसटीओ डॉ. अनिल अहलावत व दिलबाग सिंह, दीपक सिंह, भावना, अमित, नितेश, विनोद कुमार, मेघा सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

खबर पसंद आई?इसे शेयर करें
लेखक✓ Verified Author

Sahab Ram

ताजा खबरों और अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।