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बीजेपी सरकार का हमें सादगी का उपदेश और खुद कर रहे ऐशो-आराम: प्रो. संपत सिंह ने सरकार के दोहरे मापदंडों पर उठाए

चंडीगढ़, 19 जून। इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक और हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने हरियाणा सरकार के सादगी (खर्च में कटौती) और ऊर्जा संरक्षण के हालिया आदेशों को केवल दिखावा बताया है। बीजेपी सरकार फिजूलखर्ची कम करने और ऊर्जा की बचत करने की बात कहकर मित्त व्यतत्ता का उपदेश देती है। बीजेपी सरकार एक तरफ सरकार विभागों को खर्च कम करने, बिजली बचाने और हमें रैली और जनसभा न करने की सलाह दे रही है, वहीं दूसरी तरफ वह खुद अनावश्यक और फिजूलखर्ची को बढ़ावा दे रही है। 8-10 जून तक कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के कार्यक्रम के आयोजन में प्रतिनिधियों व अधिकारियों के ऊपर चंडीगढ़ के फाइव-स्टार होटलों में करोड़ों रुपये खर्च किए। उन्होंने पूछा कि जब सरकार सादगी का उपदेश दे रही है, तो क्या इस तरह का खर्च उचित है?
इस दौरान पूर्व डीजीपी एमएस मलिक, कार्यालय सचिव नछत्तर सिंह मलहान, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. सतबीर सैनी और किसान सेल के प्रदेश अध्यक्ष फूल सिंह मंजूरा मौजूद रहे।
प्रो संपत सिंह ने सुझाव दिया कि सरकार को सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय ओम प्रकाश चौटाला द्वारा अपनाए गए तरीके की तरह, मंत्रियों के स्टाफ और व्यवस्था का आकार छोटा करके अपना खर्च कम करना चाहिए। बीजेपी सरकार 15 मंत्रियों की जगह 9 मंत्रियों से भी काम चला सकती है। उन्होंने सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने वाले सलाहकारों और अधिकारियों की बड़ी संख्या को कम करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि हरियाणा में लाखों प्रतिभाशाली और शिक्षित युवा गंभीर बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त और पसंदीदा आईएएस अधिकारियों को बार-बार सेवा विस्तार दिया जा रहा है और आकर्षक पदों पर फिर से नियुक्त किया जा रहा है।  अधिकारियों को 2 से 3 सरकारी आवास और गाडिय़ां मिली हुई है। बीजेपी सरकार रिटायर्ड आईएएस की शरणस्थली बनी हुई है। इन नियुक्तियों से राज्य के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, जबकि बेरोजगार युवा आर्थिक और मानसिक तनाव झेलते रहते हैं। अगर सरकार खर्च कम करना चाहती है तो ऐसे अधिकारियों को सेवा मुक्त कर घर भेज दे।
प्रो. संपत सिंह ने आगे कहा कि लगभग 111 बोर्ड, निगमों, प्राधिकरणों, मिशनों, समितियों, विशेष उद्देश्य वाली कंपनियों और अन्य सरकारी निकायों में सेवानिवृत्त अधिकारियों और राजनीतिक रूप से नियुक्त अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, सदस्यों और सलाहकारों को नियुक्त किया गया है। उन्होंने मांग की कि ऐसी नियुक्तियों की समीक्षा की जाए और वेतन, भत्ते, कार्यालय, वाहन, आवास, स्टाफ और अन्य लाभों पर होने वाले खर्च को बचाने के लिए अनावश्यक पदों को खत्म किया जाए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अगर व्यवस्था बनाए रखने और खर्च कम करने के नाम पर हमारे ऊपर सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों, रैलियों और सभाओं पर रोक लगा सकती है, तो सरकार को मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के भव्य स्वागत समारोहों, कार्यक्रमों, उद्घाटन समारोहों, शिलान्यास कार्यक्रमों, सम्मेलनों, बैठकों, प्रचार अभियानों, इवेंट मैनेजमेंट कार्यक्रमों और महंगे आधिकारिक दौरों पर भी रोक लगानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि कई अधिकारियों को एक से ज़्यादा सरकारी गाड़ी, दफ़्तर या घर दिए गए हैं, और ऐसी अतिरिक्त सुविधाओं को तुरंत वापस ले लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, मितव्ययिता का मकसद सिर्फ़ खर्च कम करने तक ही सीमित नहीं होना चाहिए।
प्रो. संपत सिंह ने कहा 80 डॉलर प्रति बैरल तेल है इसके बावजूद सरकार तेल का रेट कम नही कर रही है। संपत सिंह ने कहा प्रधानमंत्री या हरियाणा के सीएम ने देश और प्रदेश की स्थिति कैसी है इस बारे कोई जानकारी नहीं दी है।
प्रो. संपत सिंह ने कहा कि हरियाणा में सरकारी पैसे का फ्रॉड हुआ है। इस मामले में छोटी मछलियों को पकड़ा जा रहा है और बड़े मगरमच्छ नहीं पकड़े जा रहे। इस मामले में एक जगह पॉलिटिकल कनेक्शन का जिक्र भी आया था। इस पूरे मामले की जांच की पूरी जानकारी सरकार को लोगों को बतानी चाहिए। जब चौटाला साहब मुख्यमंत्री थे और मैं वित्त मंत्री था तब सरकार का पीएलए अकाउंट हुआ करता था लेकिन अब निजी बैंक में खाते खोले जा रहे हैं। प्रदेश सरकार पर 4 लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज है सरकार खुद कर्ज ले रही है जबकि निजी बैंक में दो-तीन और चार फीसदी ब्याज पर एफडी करवाई जा रही है। सरकार को इस मामले की जांच का स्टेटस लोगों को बताना चाहिए।

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लेखक✓ Verified Author

Sahab Ram

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