रोहतक, 24 जुलाई : उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि जिला में महिलाओं के स्वास्थ्य एवं निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग, डॉ. अनीता नरूला फाउंडेशन एवं एलपीएस बॉसार्ड के सहयोग से संचालित ‘स्वस्थ वाहिनी’ पहल के माध्यम से एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
सचिन गुप्ता ने बताया कि जिला में पहली बार शुरू किए गए इस जिला स्तरीय मोबाइल मैमोग्राफी कार्यक्रम ने संगठित सामुदायिक जांच के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि समय पर जांच से अनेक महिलाओं की जान बचाई जा सकती है। ‘स्वस्थ वाहिनी’ पहल यह दर्शाती है कि जब जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, निजी संस्थाएं एवं समुदाय मिलकर कार्य करते हैं, तो अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जा सकती हैं।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि हजारों महिलाओं की स्क्रीनिंग, सैकड़ों महिलाओं की परामर्श सेवाएं, दर्जनों हाई-रिस्क मामलों की पहचान तथा 13 महिलाओं में प्रारंभिक अवस्था में स्तन कैंसर की पुष्टि इस पहल की ऐतिहासिक उपलब्धि है। जिला प्रशासन ने इस अभियान को और अधिक सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि कोई भी महिला केवल इसलिए समय पर जांच और उपचार से वंचित न रहे क्योंकि स्वास्थ्य सेवाएं उसकी पहुंच से दूर हैं।
सचिन गुप्ता ने बताया कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी अर्थात सीएसआर के अंतर्गत 15 नवंबर 2025 को शुरू की गई इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं में स्तन कैंसर का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाकर समय पर उपचार सुनिश्चित करना था। इस कार्यक्रम के तहत अत्याधुनिक मैमोग्राफी सुविधाएं सीधे गांवों, शहरी बस्तियों तथा उन क्षेत्रों तक पहुंचाई गईं, जहां विशेष जांच सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं थीं।
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हजारों महिलाओं तक पहुंची जांच सुविधा :-
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि पिछले आठ महीनों के दौरान मोबाइल मैमोग्राफी वैन ने पूरे रोहतक जिला में व्यापक भ्रमण करते हुए गांवों, विद्यालयों, सरकारी संस्थानों, औद्योगिक क्षेत्रों, पुलिस लाइन, पीजीआईएमएस तथा शहरी क्षेत्रों में 147 स्क्रीनिंग शिविरों का आयोजन किया। इस अभियान के अंतर्गत 6,912 महिलाओं ने शिविरों में भाग लिया तथा 4,921 महिलाओं की क्लीनिकल ब्रेस्ट जांच की गई। आवश्यकतानुसार 3,217 महिलाओं की डिजिटल मैमोग्राफी की गई तथा 33 महिलाओं को उच्च जोखिम श्रेणी में चिन्हित कर आगे की जांच एवं विशेषज्ञ उपचार के लिए भेजा गया। इन आंकड़ों के पीछे ऐसी अनेक महिलाएं हैं, जिनमें बीमारी का पता समय रहते चल सका और जिनका उपचार प्रारंभिक अवस्था में संभव हो पाया।
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समय पर पहचान से बची कई जिंदगी :-
सचिन गुप्ता ने बताया कि इस पहल की सबसे बड़ी सफलता केवल स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रही, बल्कि समय रहते बीमारी की पहचान कर उपचार सुनिश्चित करना इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही। मैमोग्राफी के बाद हुई जांच में 13 महिलाओं में स्तन कैंसर की पुष्टि हुई। इनमें अधिकांश महिलाओं को पहले अपने रोग की कोई जानकारी नहीं थी और उनकी पहचान केवल इसलिए संभव हो सकी क्योंकि जांच सुविधा उनके घर के नजदीक पहुंची।
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जिला वार नए मामलों का विवरण इस प्रकार है :-
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि नए मामलों में शहरी रोहतक में 4 मामले, पुलिस लाइन में 1 मामला, लाखनमाजरा में 2 मामले, पठानिया स्कूल शिविर में 1 मामला, जींद शिविर में 1 मामला, पीजीआईएमएस शिविर में 3 नए मामले, जबकि 2 महिलाएं पहले से उपचाराधीन पाई गईं। इसके अतिरिक्त कई महिलाओं में विभिन्न श्रेणी के संदिग्ध घाव पाए गए, जिनके लिए तत्काल बायोप्सी एवं ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों द्वारा जांच की आवश्यकता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार स्तन कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने पर उपचार की सफलता और जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
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केवल जांच नहीं, उपचार तक निरंतर निगरानी :-
सचिन गुप्ता ने बताया कि ‘स्वस्थ वाहिनी’ पहल की विशेषता यह है कि यह केवल जांच तक सीमित नहीं है। पहले चरण की समाप्ति के बाद उच्च जोखिम वाली सभी महिलाओं के लिए एक सुनियोजित फॉलो-अप तंत्र विकसित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रत्येक हाई-रिस्क महिला की महीने में दो बार नियमित फॉलो-अप की जा रही है, ताकि जिन महिलाओं को बायोप्सी, सर्जरी अथवा कैंसर विशेषज्ञ की आवश्यकता है, उनका उपचार बिना किसी विलंब के सुनिश्चित किया जा सके। विभिन्न श्रेणी की महिलाओं की विशेष निगरानी की जा रही है तथा पीजीआईएमएस, रोहतक के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक जांच, भर्ती एवं उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
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सतत फॉलो-अप के परिणामस्वरूप :-
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि सतत फॉलो-अप के कारण 3 मरीजों का उपचार प्रारंभ हो चुका है, 2 मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार पूरा हो चुका है, जिनमें एक महिला का उपचार पीजीआईएमएस, रोहतक में किया गया तथा अन्य गैर-संचारी रोगों की भी जांच हुई है। इस अभियान के दौरान राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम को भी प्रभावी रूप से जोड़ा गया। प्रत्येक शिविर में महिलाओं की उच्च रक्तचाप, मधुमेह एवं एनीमिया की जांच भी की गई।
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जांच के दौरान :-
सचिन गुप्ता ने बताया कि जांच के दौरान 561 महिलाओं में उच्च रक्तचाप पाया गया, 654 महिलाओं में मधुमेह की पुष्टि हुई, 42 महिलाएं मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप दोनों से प्रभावित पाई गईं तथा 207 महिलाओं में गंभीर एनीमिया पाया गया, जिन्हें उपचार के लिए रेफर किया गया। सभी चिन्हित लाभार्थियों को एनसीडी स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करवाए गए तथा उन्हें निकटतम स्वास्थ्य संस्थान से जोडक़र नियमित उपचार सुनिश्चित किया गया।
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सामुदायिक सहभागिता बनी सफलता की कुंजी :-
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि इस अभियान की सफलता जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पीजीआईएमएस रोहतक, डॉ. अनीता नरूला फाउंडेशन, एलपीएस बॉसार्ड, चिकित्सा अधिकारियों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सामुदायिक स्वयंसेवकों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। विशेष रूप से आशा कार्यकर्ताओं ने महिलाओं की झिझक दूर कर उन्हें स्क्रीनिंग शिविरों तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अभियान ने न केवल जांच सुविधाओं की पहुंच बढ़ाई, बल्कि महिलाओं में स्तन की स्वयं जांच, प्रारंभिक लक्षणों एवं समय पर चिकित्सकीय परामर्श के प्रति भी व्यापक जागरूकता पैदा की।
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दूसरा चरण हुआ प्रारंभ :-
सचिन गुप्ता ने बताया कि पहले चरण में पूरे जिला को कवर करने के बाद जुलाई 2026 से सांपला ब्लॉक से इस अभियान का दूसरा चरण शुरू कर दिया गया है। दूसरे चरण में पहले से जांच करा चुकी महिलाओं की पुन: स्क्रीनिंग, नए हाई-रिस्क मामलों की पहचान, पूर्व में चिन्हित मरीजों की सतत निगरानी तथा पूरे जिला में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं का और अधिक विस्तार किया जाएगा।
घर-घर पहुंची ‘स्वस्थ वाहिनी’ ने बचाई अनमोल जिंदगी :- उपायुक्त सचिन गुप्ता









