सिरसा, 22 जुलाई।
भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के निर्देशन में क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र (आरसीआईपीएमसी), फरीदाबाद तथा संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) के सहयोग से 22 जुलाई को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कपास की फसल का संयुक्त सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण के दौरान किसानों को कपास की फसल में कीट एवं रोगों के प्रभावी प्रबंधन के लिए एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन (आईपीएम) तकनीकों की जानकारी दी गई।
क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र, फरीदाबाद के निर्देशन एवं संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) डा. आत्मा राम गोदारा के सहयोग से हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, हांसी, भिवानी, चरखी दादरी तथा जींद सहित विभिन्न जिलों में किसानों के खेतों में प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाए जा रहे हैं। वहीं रस चूसने वाले कीटों की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ लगभग 20 पीले एवं नीले स्टिकी ट्रैप लगाने का प्रदर्शन भी किया जा रहा है। इन ट्रैपों के माध्यम से खेतों में कीटों की संख्या एवं संभावित नुकसान का आंकलन किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि प्रदर्शन प्लॉटों में फेरोमोन ट्रैप के अच्छे परिणाम मिलने के बाद अन्य किसान भी इनका उपयोग कर रहे हैं, जिससे कपास में गुलाबी सुंडी के नियंत्रण में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे इस समय अपनी कपास की फसल में फेरोमोन ट्रैप एवं ल्यूर (गंध) का उपयोग अवश्य करें। इसके संबंध में अधिक जानकारी के लिए किसान अपने संबंधित खंड कृषि विकास अधिकारी, उपमंडल कृषि अधिकारी अथवा क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र, फरीदाबाद से संपर्क कर सकते हैं।
संयुक्त कृषि निदेशक कार्यालय के तकनीकी सहायक डॉ. रोबर्ट रोबिनसन ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान कपास की फसल में गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) की शुरुआती उपस्थिति देखने को मिली है। इसे देखते हुए किसानों को समय रहते आवश्यक सावधानी बरतने और कीट की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी क्षेत्र में कीटों का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से अधिक हो जाए तो भारत सरकार के केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (सीआईबी एंड आरसी) द्वारा अनुमोदित कीटनाशकों का ही वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग किया जाए।
सर्वेक्षण के दौरान किसानों को राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (एनपीएसएस) मोबाइल ऐप के उपयोग की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इस ऐप के माध्यम से किसान अपनी फसल में लगने वाले कीट एवं रोगों की पहचान कर तत्काल निदान संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे अनावश्यक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग को कम करने में मदद मिलेगी।
संयुक्त सर्वेक्षण दल में भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के डीपीपीक्यूएस-आरसीआईपीएमसी, फरीदाबाद से सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी डॉ. लक्ष्मी कांत, डॉ. के.पी. शर्मा तथा सुरजीत बर्मन, संयुक्त कृषि निदेशक (कपास), सिरसा के तकनीकी सहायक डॉ. रोबर्ट रोबिनसन तथा कृषि पर्यवेक्षक योगेश कुमार शामिल रहे।
भारत सरकार के कृषि मंत्रालय व हरियाणा कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने किया फसल सर्वेक्षण, एनपीएसएस मोबाइल ऐप की भी दी जानकारी









