भिवानी, 18 जुलाई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के चेयरमैन एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगनदीप कौर सिंह के मार्गदर्शन में एडीआर सेंटर के सभागार में मासिक बैठक एवं विधिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) पवन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में पैनल अधिवक्ताओं, मध्यस्थ अधिवक्ताओं (मीडिएटर्स) तथा अधिकार मित्र (पीएलवी) ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सीजेएम पवन कुमार ने कहा कि प्राधिकरण का मूल उद्देश्य समाज के प्रत्येक जरूरतमंद, कमजोर एवं वंचित वर्ग तक निःशुल्क, सुलभ और प्रभावी कानूनी सहायता पहुंचाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पैनल अधिवक्ता, मीडिएटर्स और पीएलवी न्यायपालिका व आमजन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जो लोगों को उनके विधिक अधिकारों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हैं। उन्होंने सभी से अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने और पात्र व्यक्तियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने का आह्वान किया।
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में कानूनी और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन किया गया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल बबली ने “नालसा (मानसिक बीमारी एवं बौद्धिक दिव्यांगता से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए विधिक सेवाएं) योजना, 2024” तथा “नालसा (बच्चों के लिए बाल-अनुकूल विधिक सेवाएं) योजना, 2024” के प्रमुख प्रावधानों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इन विशेष योजनाओं का उद्देश्य समाज के इन संवेदनशील वर्गों को त्वरित और सुलभ कानूनी सहायता प्रदान करना है। इसके उपरांत, असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल विनोद तंवर ने किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015, इसके मॉडल नियम, 2016, संबंधित नवीनतम न्यायिक निर्णयों तथा पॉक्सो अधिनियम, 2012 की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बाल संरक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और लैंगिक अपराधों से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। कार्यशाला के समापन पर सभी उपस्थित पैनल अधिवक्ताओं, मध्यस्थों और पीएलवी ने समाज के अंतिम पायदान तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।









