मक्खन सिंह ने कहा कि प्रत्येक वर्ष बरसात के मौसम में असावधानी और लापरवाही के कारण कई बच्चे कुओं, तालाबों, नदियों, बावड़ियों और पोखरों में डूबकर अपनी जान गंवा देते हैं। ऐसे हादसे न केवल एक परिवार को गहरे दुख में डाल देते हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए भी पीड़ादायक होते हैं। इसलिए समय रहते सावधानी बरतना ही सबसे बड़ा बचाव है।
उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों पर लगातार नजर रखें और उन्हें बिना किसी बड़े व्यक्ति के साथ जलाशयों के आसपास जाने की अनुमति न दें। बच्चों को अकेले या दोस्तों के साथ तालाब, नहर, नदी अथवा अन्य जल स्रोतों के पास जाने से सख्ती से रोकें। साथ ही उन्हें पानी से जुड़े छिपे हुए खतरों जैसे सांप, कीड़े, अत्यधिक गहराई आदि के बारे में भी जागरूक करें ताकि वे स्वयं भी सावधानी बरत सकें। बारिश के दौरान नदियों व नालों में जलस्तर बढ जाता है, इसलिए वहां से बच्चों को दूर ही रखें। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा की सबसे बड़ी जिम्मेदारी माता-पिता और अभिभावकों की होती है। यदि परिवार थोड़ी सी सतर्कता और जिम्मेदारी दिखाए तो कई दुखद घटनाओं को होने से रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा, आज बरती गई थोड़ी-सी सावधानी किसी हंसते-खेलते परिवार को उजड़ने से बचा सकती है। बच्चों की सुरक्षा के प्रति सजग रहकर हम न केवल उनके जीवन की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि परिवार और प्रशासन को भी अनावश्यक परेशानियों से बचा सकते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि मानसून के दौरान बच्चों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए पूरी सतर्कता बरतें।









