हिसार, 21 जून।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। गांव कुतुबपुर, खरड़ अलीपुर और रायपुर में पहुंचे अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को नशे के दुष्प्रभावों, इसके सामाजिक और आर्थिक नुकसान तथा नशा छोड़ने के उपलब्ध उपचार और परामर्श सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अभियान के दौरान ग्रामीणों को पंपलेट वितरित किए गए और युवाओं को योग, खेलकूद तथा सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन नशा मुक्त मित्र एवं युवा सामाजिक कार्यकर्ता राहुल शर्मा ने जिला प्रशासन एवं जिला समाज कल्याण अधिकारी महावीर गोदारा के दिशा-निर्देश में आरोग्य भारती के सहयोग से किया।
राहुल शर्मा ने कहा कि आज के समय में नशा केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए चुनौती बनता जा रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में कई युवा गलत संगति, तनाव और जागरूकता के अभाव में नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं। समय रहते उपचार और परामर्श नहीं मिलने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है, जिससे शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार योग शरीर और मन को स्वस्थ रखने का माध्यम है, उसी प्रकार नशे से दूरी बनाकर ही स्वस्थ और संतुलित जीवन जिया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का संदेश भी यही है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर समाज को नशे जैसी बुराइयों से मुक्त किया जाए।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि नशा एक मानसिक एवं व्यवहारिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसका उपचार संभव है। यदि कोई व्यक्ति नशे की लत से जूझ रहा है तो उसे छिपाने के बजाय समय पर विशेषज्ञों से सलाह और उपचार लेना चाहिए। लोगों को नशा प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का भी संदेश दिया गया।
इस अवसर पर मंत्रालय की टोल फ्री हेल्पलाइन 14446 की जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि नशा प्रभावित व्यक्ति और उनके परिजन इस नंबर पर संपर्क कर नि:शुल्क परामर्श और सहायता प्राप्त कर सकते हैं। अभियान के अंत में ग्रामीणों और युवाओं ने नशे से दूर रहने तथा अपने गांवों को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि जनभागीदारी और सतत जागरूकता के माध्यम से ही नशा मुक्त, स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।









