चंडीगढ़, 24 अगस्त — राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने आज चंडीगढ़ स्थित नए हरियाणा सिविल सचिवालय में अपने कार्यालय में रोहतक जिला गजेटियर-2025 का विमोचन किया।
लगभग 650 पृष्ठों का यह प्रकाशन वर्ष 1966 में हरियाणा के अलग राज्य के रूप में गठन के बाद प्रकाशित किए गए जिला गजेटियरों की श्रृंखला का 15वां प्रकाशन है। यह वर्ष 1970 में प्रकाशित रोहतक जिला गजेटियर का पहला संशोधित संस्करण है। इसमें 19 अध्याय हैं, जो 484 पृष्ठों में विस्तृत हैं। इसके साथ 72 तालिकाओं वाला एक परिशिष्ट तथा 40 पृष्ठों में रंगीन चित्र भी शामिल हैं।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि जिला गजेटियर “लघु विश्वकोश” की तरह होते हैं, जिनमें किसी जिले के भूगोल, जनसंख्या, समाज एवं संस्कृति, इतिहास, अर्थव्यवस्था, प्रशासन और विकास से संबंधित व्यापक एवं प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध होती है।
गजेटियर के अनुसार, रोहतक का प्राचीन नाम ‘रोहितक’ था, जिसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। पांडव योद्धा नकुल के पश्चिमी अभियान के संदर्भ में इस क्षेत्र का उल्लेख ‘रोहितक’ नाम से किया गया है। माना जाता है कि इस क्षेत्र में ‘रोहेरा’ वृक्षों के वन के कारण इसका नाम ‘रोहितक’ पड़ा।
पुरातात्विक साक्ष्यों से पता चलता है कि रोहतक क्षेत्र में प्राचीन काल से ही मानव बस्तियां विद्यमान थीं और यह क्षेत्र समय के साथ सांस्कृतिक एवं राजनीतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। गजेटियर में उल्लेख है कि इस क्षेत्र के पुरातात्विक स्थलों का संबंध सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी बस्तियों से रहा है। वहीं, खोखराकोट के प्राचीन टीले हड़प्पा सभ्यता से संबंधित अवशेषों के ऊपर स्थित माने जाते हैं।
गजेटियर में रोहतक जिले के राजनीतिक इतिहास को विभिन्न शासन व्यवस्थाओं के क्रम में प्रस्तुत किया गया है। यह क्षेत्र चाहमान वंश के शासक पृथ्वीराज चौहान तृतीय के व्यापक नियंत्रण में रहा। वर्ष 1192 में चौहान की पराजय के बाद यह क्षेत्र मुहम्मद गौरी के नियंत्रण में आ गया। दिल्ली सल्तनत और मुगल काल के दौरान यह क्षेत्र अक्सर विभिन्न सामंतों एवं अमीरों को सैन्य जागीर के रूप में सौंपा जाता रहा।
30 दिसंबर, 1803 को हुई सुर्जी-अंजनगांव की संधि के बाद यमुना के पश्चिम में मराठा शासक दौलत राव सिंधिया के अधीन आने वाले अन्य क्षेत्रों के साथ रोहतक क्षेत्र भी ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के नियंत्रण में आ गया।
वर्ष 1948 में तत्कालीन पंजाब का हिस्सा रहे इस जिले ने अपना वर्तमान स्वरूप ग्रहण किया, जब तत्कालीन दुजाना रियासत का इसमें विलय हुआ। इसके बाद 1 नवंबर, 1966 को हरियाणा के भारत संघ के 17वें राज्य के रूप में गठन के समय रोहतक प्रदेश के सात मूल जिलों में शामिल था। उस समय रोहतक जिले में रोहतक, सोनीपत, गोहाना और झज्जर तहसीलें तथा नाहर उप-तहसील शामिल थीं।
बाद में 22 दिसंबर, 1972 को सोनीपत तथा 15 जुलाई, 1997 को झज्जर को तत्कालीन रोहतक जिले से अलग करके नए जिले बनाए गए।
संशोधित गजेटियर में विशेष रूप से पिछले पांच दशकों में रोहतक जिले में हुए विकास का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें इतिहास, जनसंख्या, कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों, उद्योग, बैंकिंग, व्यापार एवं वाणिज्य, परिवहन एवं संचार, आधारभूत संरचना, कानून एवं न्याय, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन जैसे विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
इसके अलावा, रोहतक के शिक्षा एवं चिकित्सा सुविधाओं के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरने, खेल एवं खेल अवसंरचना के विकास तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में इसकी बढ़ती भूमिका और दिल्ली एवं आसपास के क्षेत्रों से इसकी बेहतर कनेक्टिविटी का भी उल्लेख किया गया है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि इस प्रकार के प्रकाशन प्रशासकों, योजनाकारों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों, पर्यटकों और आम जनता के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में उपयोगी होते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संशोधित रोहतक जिला गजेटियर शोधार्थियों, इतिहासकारों, समाज वैज्ञानिकों तथा नागरिक समाज के लिए उपयोगी साबित होगा।
रोहतक जिला गजेटियर बिक्री के लिए मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग, राजकीय प्रेस, सेक्टर-6, पंचकूला स्थित सेल डिपो में उपलब्ध रहेगा। जिले के इतिहास, विरासत और विकास से संबंधित इस महत्वपूर्ण दस्तावेज को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए इसकी प्रतियां हरियाणा के जिला पुस्तकालयों और राज्य के विश्वविद्यालयों में भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
एक नई पहल के तहत डॉ. मिश्रा ने बताया कि यह गजेटियर जल्द ही राजस्व विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, इतिहासकारों और आम जनता को रोहतक जिले की ऐतिहासिक एवं समकालीन यात्रा से संबंधित इस व्यापक दस्तावेज तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।
डॉ. मिश्रा ने उपायुक्त, रोहतक और जिला प्रशासन द्वारा दिए गए निरंतर सहयोग की सराहना की। उन्होंने विभिन्न स्वायत्त संस्थानों और एजेंसियों तथा केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के प्रमुखों के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित विस्तृत जानकारी और महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराकर जिला गजेटियर तैयार करने में सहयोग दिया।
वित्तायुक्त ने श्री कमलेश कुमार भादू, राज्य संपादक गजेटियर्स-सह-सचिव राजस्व; श्रीमती रजनी गुप्ता, संयुक्त राज्य संपादक; श्री सुरेंद्र कुमार, संपादक; तथा सहायक संपादकों श्री सुरिंदर सिंह सेवल, श्रीमती अमिता अरोड़ा, श्री राजेश सिंह, श्रीमती रोशनी देवी और श्रीमती मीनाक्षी कालरा सहित राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, हरियाणा के गजेटियर्स संगठन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा किए गए निरंतर एवं सराहनीय प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन सभी के सामूहिक प्रयासों से यह महत्वपूर्ण प्रकाशन तैयार हो सका है।









