रोहतक, 16 मई। महिला सशक्तिकरण और कृषि क्षेत्र में नवाचार का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए जिला के गांव आंवल निवासी (वर्तमान में दिल्ली के प्रीतमपुरा स्थित सैनिक विहार निवासी) 53 वर्षीय उषा रानी ने मछली पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उषा रानी ने बिना किसी औपचारिक पृष्ठभूमि के, केवल अपने बचपन के शौक और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर आज एक समृद्ध व्यवसाय खड़ा कर लिया है।
शुरुआत और प्रेरणा :-
कक्षा 10वीं तक शिक्षित उषा रानी मूल रूप से एक गृहिणी थीं। मछली पालन के प्रति उनके लगाव ने उन्हें इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए प्रेरित किया। उनके इस सफर की शुरुआत 1984 में एक पंचायती तालाब से हुई थी, लेकिन उनके जीवन में असली बदलाव साल 2021 में आया।
उपलब्धियाँ और विस्तार :-
वर्ष 2021 में उषा रानी ने रोहतक जिला की तहसील कलानौर स्थित आंवल रोड पर अपनी 4 एकड़ भूमि पर मछली पालन शुरू किया। उन्होंने 85,000 बीज स्टॉकिंग के साथ पंगासियस और आईएमसी प्रजातियों पर ध्यान केंद्रित किया। उनकी मेहनत का फल यह रहा कि मात्र एक वर्ष में उन्होंने 75 टन का उत्पादन किया और लगभग 11 लाख रुपए की आय अर्जित की।
सरकारी सहायता का लाभ :-
उषा रानी की इस सफलता में भारत सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस योजना के तहत उन्हें 9 लाख रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई, जिससे उन्हें अपने कार्यों का विस्तार करने में बड़ी मदद मिली। आज वह 11 एकड़ भूमि पर मछली पालन कर रही हैं और उनकी वार्षिक आय बढक़र 12 लाख रुपए तक पहुंच गई है।
भविष्य का लक्ष्य :-
अपनी सफलता से उत्साहित उषा रानी अब अन्य लोगों को भी जलीय कृषि अर्थात एक्वाकल्चर के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित करना चाहती हैं। उन्होंने अपनी इस प्रेरक यात्रा में मत्स्य विभाग द्वारा दिए गए निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन के लिए गहरा आभार व्यक्त किया है।
घरेलू महिला से सफल मछली पालक तक उषा रानी ने पेश की स्वरोजगार की मिसाल









