जिला उपायुक्त महेंद्र पाल की अध्यक्षता में बुधवार को दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित मामलों के निस्तारण तथा दहेज प्रथा पर अंकुश लगाने हेतु संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
उपायुक्त ने दहेज प्रथा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दहेज से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कहीं से भी दहेज मांगने, लेने या देने की शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित विभाग तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें और पीडि़त पक्ष को न्याय दिलाने में देरी न हो। उन्होंने कहा कि दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के तहत दहेज लेना, देना या इसके लिए किसी को प्रेरित करना कानूनन अपराध है, जिसके लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की जाए तथा किसी भी पक्ष पर अनावश्यक दबाव न बनने दिया जाए। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर दहेज निषेध अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है, जिससे शिकायतों का त्वरित निपटारा किया जा सके। जिले के सभी एसडीएम को इस जिम्मेदारी के तहत कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि हर क्षेत्र में प्रभावी निगरानी बनी रहे।
उपायुक्त महेंद्र पाल ने महिला एवं बाल विकास विभाग तथा महिला पुलिस विभाग को विशेष रूप से निर्देश देते हुए कहा कि दहेज से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ तुरंत कार्रवाई की जाए और पीड़ितों को हर संभव सहायता उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा। इसके लिए शिक्षा विभाग, पंचायत विभाग और सामाजिक संगठनों के सहयोग से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि लोगों में इस विषय को लेकर सकारात्मक सोच विकसित हो सके। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन इस सामाजिक बुराई के खिलाफ पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।









