चंडीगढ़, 2 जुलाई। हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को केंद्र सरकार द्वारा 31 दिसंबर 2026 तक छ: महीने का सेवा-विस्तार दिए जाने के बाद अब राज्य के 1990 बैच के शेष तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को “स्पेशल चीफ सेक्रेटरी” का पदनाम देने की मांग उठी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने इस संबंध में आज प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव को सार्वजनिक अपील-सह-अभ्यावेदन भेजकर सरकार से तत्काल निर्णय लेने का आग्रह किया है।
हेमंत ने अपील की है कि वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत सुधीर राजपाल, डॉ. सुमिता मिश्रा तथा राजा शेखर वुंद्रु, जो सभी 1990 बैच के आई.ए.एस. अधिकारी हैं, उन्हें मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के विस्तारित कार्यकाल के दौरान स्पेशल चीफ सेक्रेटरी का पदनाम प्रदान किया जाए।
उन्होंने अपने अभ्यावेदन में उल्लेख किया कि किसी भी आई.ए.एस. बैच का अधिकारी जब राज्य का मुख्य सचिव बन जाता है तो प्रशासनिक परंपराओं एवं वरिष्ठता की भावना के अनुरूप उसी बैच के अन्य अधिकारियों को भी स्पेशल चीफ सेक्रेटरी का पदनाम दिया जाना उचित माना जाता है। इससे प्रशासनिक गरिमा और संस्थागत संतुलन कायम रहता है।
हेमंत ने आगे यह भी लिखा है कि इस निर्णय से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, क्योंकि मुख्य सचिव, स्पेशल चीफ सेक्रेटरी तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव—तीनों का वेतनमान पे मैट्रिक्स के लेवल-17 में समान है और सभी को ₹2.25 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। इसलिए यह केवल पदनाम और प्रशासनिक सम्मान का विषय है, न कि वेतन या अन्य आर्थिक लाभ का।
अभ्यावेदन में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में हरियाणा में 1991 से 1996 बैच के कई आईएएस अधिकारी अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत हैं। ऐसे में 1990 बैच के शेष वरिष्ठ अधिकारियों को भी उसी पदनाम पर बनाए रखना प्रशासनिक वरिष्ठता और स्थापित सेवा-परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता, जबकि उनके ही बैच के एक अधिकारी मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
हेमंत ने यह भी उल्लेख किया है कि सामान्य प्रशासनिक परंपरा के अनुसार, जब किसी बैच का एक अधिकारी मुख्य सचिव बन जाता है तो उसी बैच के अन्य अधिकारियों को औपचारिक रूप से उसके अधीनस्थ पदनाम पर नहीं रखा जाता। स्पेशल चीफ सेक्रेटरी का पदनाम इस संतुलन को बनाए रखते हुए वरिष्ठता, गरिमा और प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करता है, जबकि विभागीय कार्यप्रणाली और कमांड स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं होता।
हेमंत ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए उन्होंने पड़ोसी राज्य पंजाब का उदाहरण भी दिया है। वहां 1992 बैच के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा के साथ उसी बैच के सरवजीत सिंह और राजी पी. श्रीवास्तव स्पेशल चीफ सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत हैं, जबकि 1990 बैच के अनिरुद्ध तिवारी भी स्पेशल चीफ सेक्रेटरी का पद संभाल रहे हैं।
हेमंत ने हरियाणा सरकार से सार्वजनिक आह्वान किया है कि पंजाब की यह व्यवस्था एक स्थापित प्रशासनिक मिसाल है और हरियाणा सरकार को भी इसी प्रकार की व्यवस्था अपनाकर वरिष्ठतम अधिकारियों की गरिमा, प्रशासनिक परंपराओं और संस्थागत संतुलन को बनाए रखना चाहिए।
प्रतिवेदन के अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि हरियाणा सरकार प्रशासनिक शुचिता, सेवा-परंपराओं, संस्थागत पदानुक्रम तथा सुशासन के व्यापक हित में इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।









