रोहतक , 3 जुलाई।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के
बीच व्यापार, उद्यमिता और उच्च शिक्षा के भविष्य पर चर्चा के लिए एकेडमी
फॉर ग्लोबल बिजनेस एडवांसमेंट (AGBA) की 22वीं वर्ल्ड कांग्रेस का
शुभारंभ मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हुआ। तीन दिवसीय इस सम्मेलन
(2-4 जुलाई) की सह-मेजबानी भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रोहतक के साथ
अमेरिका, ओमान, वियतनाम और मलेशिया के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय कर
रहे हैं।
“वैश्वीकरण और डिजिटलीकरण के दौर में व्यवसाय एवं उद्यमिता का विकास”
विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में 22 देशों के प्रतिनिधि, 104
विश्वविद्यालयों, 10 गैर-शैक्षणिक संस्थानों तथा उद्योग जगत और सरकारी
एजेंसियों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में 260 शोध-पत्र
प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनका चयन अंतरराष्ट्रीय स्तर की डबल-ब्लाइंड
समीक्षा प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है।
उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों ने वैश्विक संघर्षों, युद्ध और बढ़ती
अनिश्चितताओं का व्यापार, निवेश और आर्थिक विकास पर पड़ रहे प्रभाव पर
चर्चा की। साथ ही संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में व्यापार संचालन, पर्यटन और
हॉस्पिटैलिटी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए शोध और सहयोग बढ़ाने पर सहमति
बनी।
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण IIM रोहतक के निदेशक प्रो. धीरज पी. शर्मा की
पुस्तक “Understanding Indian Youth: The Gen Z Propensities” का
अंतरराष्ट्रीय विमोचन रहा। यह पुस्तक भारत की नई पीढ़ी Gen Z की बदलती
सोच, आकांक्षाओं और व्यवहार को समझने पर आधारित है। इस अवसर पर प्रो.
शर्मा को व्यवसाय शिक्षा, शोध और अकादमिक नेतृत्व में उत्कृष्ट योगदान के
लिए AGBA Distinguished Innovative Academic Leader Award-2026 से
सम्मानित किया गया।
अपने मुख्य संबोधन में प्रो. शर्मा ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पारंपरिक
सोच से आगे बढ़कर उद्देश्यपूर्ण जीवन, नए अनुभव और बेहतर वर्क-लाइफ
बैलेंस को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि बदलती पीढ़ी की
अपेक्षाओं को समझने के लिए शिक्षण संस्थानों, उद्योगों और
नीति-निर्माताओं को अपनी कार्यशैली और नेतृत्व मॉडल में बदलाव लाना होगा।
सम्मेलन के पहले दिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उच्च शिक्षा, उन्नत शोध
पद्धतियों और अंतरराष्ट्रीय शोध प्रकाशन से जुड़े 10 फैकल्टी डेवलपमेंट
वर्कशॉप भी आयोजित किए गए। वहीं, विभिन्न देशों के विश्वविद्यालयों के
डीन और उद्योग विशेषज्ञों ने शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग, डिजिटल
परिवर्तन तथा वैश्विक प्रबंधन की चुनौतियों पर विचार साझा किए।









