चंडीगढ़, 4 जून-हरियाणा सरकार कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने के लिए नई पीढ़ी की व्यवस्था और नियामकीय सुधारों को आगे बढ़ा रही है। इनमें प्रस्तावित राइट टू बिजनेस फ्रेमवर्क, मांग-आधारित भूमि उपयोग नियोजन, युक्तिसंगत अग्नि सुरक्षा मानदंड, स्वास्थ्य क्षेत्र में एकीकृत अनुमोदन प्रणाली तथा कानूनों एवं सरकारी अधिसूचनाओं का केंद्रीकृत डिजिटल भंडार विकसित करना शामिल है।
अनुपालन में कमी एवं विनियमन में ढील देने के लिए चलाए जा रहे अभियान के पहले और दूसरे चरण की प्रगति की समीक्षा के लिए हुई उच्चस्तरीय बैठक में कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव श्री के.के. पाठक तथा हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने विभागों को अनुपालन संबंधी बोझ कम करने, कारोबारी सुगमता में सुधार लाने तथा नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत करने वाले सुधारों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
श्री रस्तोगी ने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-संचालित और सुविधाजनक बनाना है। साथ ही नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाओं को कम करना है।
बैठक में बताया गया कि भूमि उपयोग अनुमतियों, औद्योगिक स्वीकृतियों, पर्यावरणीय मंजूरियों तथा स्व-प्रमाणीकरण प्रणालियों में पहले ही कई महत्वपूर्ण सुधार किए जा चुके हैं। भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) अनुमति प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की संख्या 19 से घटाकर केवल 3 कर दी गई है, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों के लिए ऑटो-सीएलयू व्यवस्था लागू की गई है।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में सीएलयू अनुमति की आवश्यकता नहीं है। इससे भूमि मालिकों और निवेशकों को अधिक लचीलापन प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार स्वचालित अनुमोदन प्रणाली का अन्य श्रेणियों तक विस्तार करने की दिशा में भी कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि औद्योगिक विकास से संबंधित नियमों में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। औद्योगिक भूमि उपयोग, परियोजना संशोधन, सब-लीजिंग तथा प्लॉट प्रबंधन में लचीलापन बढ़ाया गया है। औद्योगिक प्लॉटों के उप-विभाजन को प्रोत्साहित करने वाले उपायों से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए औद्योगिक भूमि अधिक सुलभ और किफायती बनने की संभावना है।
हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र (एचईपीसी) को निवेशकों के लिए बहु-विभागीय अनुमोदनों की सिंगल विंडो सुविधा के रूप में और अधिक सशक्त बनाया जा रहा है और यह एक व्यापक निवेशक सहायता मंच के रूप में उभर रहा है।
कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने और औद्योगिक भूमि के अधिकतम उपयोग के लिए फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर), ग्राउंड कवरेज और सेटबैक मानकों से संबंधित नियमों को भी उदार बनाया गया है।
बैठक में प्रदेश में स्व-प्रमाणीकरण और थर्ड-पार्टी सर्टिफिकेशन प्रणालियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि कम जोखिम वाली इमारतों के लिए ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट स्व-प्रमाणीकरण के आधार पर जारी किए जा रहे हैं, जबकि उच्च जोखिम वाली श्रेणियों के लिए थर्ड-पार्टी सर्टिफिकेशन व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। इसी प्रकार के सुधार प्रदूषण नियंत्रण और अग्नि सुरक्षा अनुमोदनों में भी लागू किए जा रहे हैं।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ तथा ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ की स्वीकृति अवधि को 30 कार्य दिवसों से घटाकर 21 कार्य दिवस कर दिया है। पात्र उद्योगों के लिए ऑटो-रिन्यूअल की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे अनुपालन लागत और प्रक्रियागत विलंब में उल्लेखनीय कमी आएगी।
निजी शैक्षणिक संस्थानों के लिए भूमि एवं आधारभूत संरचना से संबंधित कठोर मानकों को सरल बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसी प्रकार उच्च शिक्षा क्षेत्र में अधिक सुगम और परिणामोन्मुखी नियामकीय परिवेश विकसित करने की दिशा में पहल की जा रही है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुमोदन प्रक्रियाओं को सिंगल नोडल मैकेनिज्म के माध्यम से सुव्यवस्थित करने तथा चिकित्सा पेशेवरों के पंजीकरण संबंधी आवश्यकताओं को सरल बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। पर्यटन क्षेत्र में हाॅस्पिटैलिटी से जुड़ी परियोजनाओं, किफायती आवास सुविधाओं और निजी निवेश को बढ़ावा देने हेतु अनुपालन प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने प्रस्तावित केंद्रीकृत डिजिटल रिपॉजिटरी की प्रगति की भी समीक्षा की। इस मंच से नागरिकों, व्यवसायों तथा सरकारी विभागों को राज्य के अधिनियमों, नियमों, विनियमों, सरकारी आदेशों और नीतियों तक आसान पहुंच मिलगी, जिससे पारदर्शिता और नियामकीय निश्चितता को बढ़ावा मिलेगा।
विभागों को सुधारों के क्रियान्वयन में निरंतरता बनाए रखने के निर्देश देते हुए श्री रस्तोगी ने कहा कि अनुपालन में कमी और विनियमन में ढील देने के कार्यक्रम से प्रदेश की स्थिति निवेश, विनिर्माण, नवाचार और रोजगार सृजन के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में और मजबूत होगी।
बैठक में नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अनुराग अग्रवाल, अग्निशमन सेवाएं विभाग के महानिदेशक श्री शेखर विद्यार्थी, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक श्री यश गर्ग, नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के निदेशक श्री अमित खत्री तथा हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष श्री विनय प्रताप सिंह समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।









