×
Chaupal Tv
Haryana

प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधान सभा अध्यक्ष को किताब की प्रति भेंट की

झज्जर, 29 जुलाई। ओम प्रकाश धनखड़ का पुस्तक श्रेष्ठ की अभिव्यक्ति हो – Give Your Best के दूसरा संस्करण छपा है । जिसके लिए देश के 14 वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपना पत्र लिख अपना आशीर्वचन दिया है- उन्होंने कहा जो यह रचना केवल वाचन  या समझ के लिये नही अपितु  जीवन जीने के लिये है ।
यहाँ रचना हर किसी को जीवन मे एक मंत्र अपनाने का आग्रह करती है , जो अनजाने में ही जीवन का ध्येय तय करा देता हैं । जो पढ़ेंगे , चलेंगे वो बढ़ेंगे .  धनखड़ जी की यह पुस्तक छोटी है परंतु सफलता के मंत्र के साथ साथ परम सत्य के साक्षात्कार के द्वार खोलती हैं । पुस्तक में प्रवेश कर सत्य के दर्शन तो स्वयं करने होंगे । अंग्रेज़ी अनुवाद पुस्तक का व्याप ग़ैर हिंदी भाषी क्षेत्रों तक बढ़ाता हैं ।

धनखड़ जी कर्म के सरोकार में कर्म के दस स्तर बताये है ।

मनुष्य की पहचान उसके कर्म के स्तर से होती हैं, कर्म के दस स्तर होते है ।
1. केवल दिन काटना ।
2. तय दिनचर्या में समय बिताना – जैसे कई सेवानिवृत्त लोगों की जीवन शैली होती हैं ।
3. दिनचर्या के साथ-साथ  सेहत को भी शानदार रखना ।
4. अपनी आजीविका स्वयं  कमाकर जीवन यापन रखना ।
5. इतना सक्षम होना की परिवार का पालन कर सके और मित्रों की सहायता कर सके ।
6. स्वयं की तरक्की के लिए भी समय निकालना और बढ़ते जाना ।
7. अपनी रूचि , शौक के लिए समय देना उन्हें निखार कर बेहतरीन करना ।
8. लोक कल्याण के कार्य करना , और उनका श्रेय लेना ।
9. स्वधर्म – राष्ट्रहित-जिससे लिए प्राण भी न्योछावर करने पड़ जाये तब भी तत्पर , जैसे सैनिक देश के लिए प्राण बलिदान कर देते है ।
10. बिना प्रचार लोक कल्याण, परमार्थ कर्म बिन अपेक्षा ।
आपके जीवन में सबसे उच्च स्तर के कर्म को पहचाने अर्जित करें और निष्पादन करें । कर्म ही मनुष्य की जान है , पहचान है, , शान है , मान है  और आन है ।

उन्होंने अपनी पुस्तक में दो विचार यात्राओं का जिक्र किया है । जो संगति से घटित हुई हैं ।

हमारे धार्मिक ग्रंथों में दो विचार यात्राएं हैं । एक रामायण में जो महाराज दशरथ के महल में घटित होती हैं । दूसरी महाभारत में कुरूक्षेत्र के युद्ध के मैदान में ज्योतिसर मे ।
महारानी कैकेयी श्री राम के राज्याभिषेक की सूचना से ख़ुशियों से भरी हुई है । खुशी की सूचना पर मिठाई आभूषण परिचारिकाओं में वितरित कर रही है । मंथरा नामक दासी विचार के निम्न लेवल पर स्वार्थ की संकीर्णता से भरी है । मंथरा अपने विचारों से कैकेयी को अपने लेवल पर ले आती हैं । यह विचारों की अधोगामी यात्रा है । परिणाम जीवन भर से आगे बढ़कर सहस्रों वर्षों तक बदनामी, पति की शोक में मृत्यु को कलंक, पुत्र भरत माँ के व्यवहार से उत्पन्न कालिख से बचने के लिये, 14 वर्षों तक तपस्वी के जीवन में अयोध्या से बाहर नंदीग्राम रहे ।
दूसरी यात्रा में अर्जुन अपने रथ पर परंतु संशय में घिरे हुए है । लड़े या ना लड़े , लड़े तो लड़े किससे , लड़ें किस लिये, राज के लिए सब अपनों का वध कर देवे । श्री कृष्ण सारथी के रूप में उपस्थित हैं नंदीघोष रथ पर । अर्जुन अपने मानसिक द्वंद्व को प्रकट करता है । श्री कृष्ण उसे स्वधर्म का बोध कराते हैं । यह युद्ध मात्र इंद्रप्रस्थ या हस्तिनापुर के शासन के लिए नही है । सत्य और धर्म के मूल्यों के लिए है । तुम क्षत्रिय हो – सही के लिए लड़ना तुम्हारा स्वधर्म है । स्वधर्म वो कर्तव्य हैं जिसके लिए लड़ते हुए बलिदान होने में भी यश है । विजय तो विजय ही है । स्वधर्म च्युत होने पर ना यश ना कीर्ति ना संतोष है ।

श्री कृष्ण ज्ञान योग , कर्म योग व भक्ति योग , सांख्य योग, विभूति योग सहित तब तक सभी ज्ञात ज्ञान मार्गों से अर्जुन तों श्रीमद्भागवत गीता का उपदेश देते है । अर्जुन को अपने संशय से उठाकर विवेक उस तल पर ले जाते है जहां वह स्वधर्म व मूल्यों के लिए युद्ध को अपरिहार्य रूप में देख पाता है । युद्ध करता है और संसार में यश का भागी बनता हैं । यह विचारों की ऊर्ध्व गामी यात्रा है ।

संगति विचारों की ऊर्ध्व अथवा अधोगामी दिशा पर ले जाती हैं ।

पुस्तक पठनीय है और विवेक दरवाज़े खोलती है एक नई पीढ़ी के तरक्की के मार्ग को प्रशस्त कर सकती हैं ।
आज धनखड़ जी संजय अहूजा के रेस्टोरेन्ट रसयात्रा मे प्रिंट मीडिया के वरिष्ठ पत्रकारों संग चर्चा की । उनके साथ डा० संजय शर्मा व संजय अहूजा भी थे ।

बॉक्स

बुधवार को प्रातः औमप्रकाश धनखड़  ने यह द्वितीय संस्करण की प्रति मुख्यमंत्री नायब सैनी जी एवं विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण जी को भी भेंट की  । परसों स्वयं माननीय पूर्व राष्ट्रपति कोविंद जी को भी इसकी प्रति समर्पित की गई ।

खबर पसंद आई?इसे शेयर करें
लेखक✓ Verified Author

Sahab Ram

ताजा खबरों और अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।