चंडीगढ़, 28 जुलाई। एक ओर संसद के मानसून सत्र में सोमवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में प्रस्तुत किया गया, जिस पर आज चर्चा होने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर हरियाणा में पांच वर्ष पहले लागू किए गए हरियाणा लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2021 की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं विधिक-प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने दावा किया है कि कानून लागू होने के लगभग पांच वर्ष बाद भी उसके तहत आवश्यक नियम (Rules) अधिसूचित नहीं किए गए हैं, जिससे कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर तकनीकी और कानूनी प्रश्न उत्पन्न होते हैं।
हेमंत ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 लागू किया, तो उसने महज दो दिन के भीतर उसके अंतर्गत लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) नियम, 2024 भी अधिसूचित कर दिए। इसके विपरीत, हरियाणा सरकार आज तक ऐसा नहीं कर सकी है।
2021 में बना कानून, उसी दिन लागू भी हुआ
हेमंत के अनुसार, तत्कालीन भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के कार्यकाल में हरियाणा विधानसभा ने अगस्त 2021 के मानसून सत्र में हरियाणा लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2021 पारित किया था। तत्कालीन राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने 4 सितम्बर 2021 को
उन्होंने बताया कि अधिनियम में यह प्रावधान था कि इसे राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किसी तिथि से लागू किया जाएगा। संयोगवश, उसी दिन तत्कालीन मुख्य सचिव विजय वर्धन द्वारा जारी अलग अधिसूचना के माध्यम से 10 सितम्बर 2021 को ही इसकी प्रवर्तन तिथि घोषित कर दी गई। इस प्रकार, 12 सितम्बर 2021 को आयोजित हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) प्रारंभिक परीक्षा से दो दिन पहले ही यह कानून पूरे प्रदेश में लागू हो गया था।
‘कानून है, लेकिन नियम नहीं‘
हेमंत ने ध्यान दिलाया कि अधिनियम की धारा 14(1) राज्य सरकार को इसके उद्देश्यों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु नियम बनाने का स्पष्ट अधिकार और दायित्व प्रदान करती है। इसके बावजूद, लगभग पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी संबंधित नियम अधिसूचित नहीं किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी अधिनियम और उसके अंतर्गत बनाए जाने वाले नियमों का संबंध “चोली-दामन” जैसा होता है। अधिनियम व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जबकि नियम उसके व्यावहारिक और प्रशासनिक क्रियान्वयन की विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित करते हैं। ऐसे में बिना नियमों के कानून लागू रहने से उसके प्रभावी और एकरूप अनुपालन में गंभीर व्यावहारिक एवं कानूनी कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
केंद्र सरकार ने पेश किया अलग उदाहरण
हेमंत ने बताया कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा तत्कालीन 17वीं लोक सभा के अंतिम सत्र दौरान अर्थात जनवरी-फरवरी 2024 में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2024 को संसद के दोनों सदनों से पारित कराया गया था, जिसे 12 फरवरी 2024 को देश की राष्ट्रपति की स्वीकृति मिल गई। हालांकि इसे तत्काल लागू नहीं किया गया।
इसके बाद अप्रैल-मई 2024 में मौजूदा 18वीं लोक सभा के आम चुनावों के उपरांत केंद्र में लगातार तीसरी बार सत्ता सँभालने वाली मोदी सरकार सरकार ने 21 जून 2024 से उपरोक्त अधिनियम (कानून) को लागू किया और उसके सिर्फ दो दिन बाद 23 जून 2024 को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) नियम, 2024 भी बन गये जिन्हें 24 जून 2024 को भारत सरकार के राजपत्र (गजट) में अधिसूचित कर दिया गया, जो उसी दिन से प्रभावी भी हो गए । हेमंत का कहना है कि यह उदाहरण दर्शाता है कि किसी भी नए कानून के साथ आवश्यक नियमों को समयबद्ध ढंग से अधिसूचित करना सुशासन और प्रभावी विधि-प्रवर्तन का अनिवार्य हिस्सा है।
हरियाणा कानून में संशोधन की भी उठी मांग
हेमंत ने कहा कि संसद में विचाराधीन संशोधन विधेयक, 2026 के मद्देनज़र हरियाणा सरकार को भी अपने 2021 के नकल विरोधी कानून की व्यापक समीक्षा करनी चाहिए। उनके अनुसार, राज्य सरकार को न केवल लंबित नियम तत्काल अधिसूचित करने चाहिए, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय कानून की तर्ज पर अधिनियम को और अधिक प्रभावी एवं कठोर बनाने के लिए आवश्यक संशोधन भी करने चाहिए, ताकि सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूत किया जा सके।









