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मत्स्य पालन : ई-प्लेटफॉर्म से और बेहतर होगी मार्केटिंग, सरकार भी दे रही सब्सिडी

सिरसा, 16 जून।
मत्स्य पालन क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के उद्देश्य से सरकार द्वारा “मछली और मत्स्य उत्पादों के ई-ट्रेडिंग और ई-मार्केटिंग के लिए ई-प्लेटफॉर्म हेतु सब्सिडी योजना” संचालित की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मछली पालकों, उद्यमियों और मत्स्य उत्पादों से जुड़े व्यवसायियों को ऑनलाइन बाजार उपलब्ध करवाना है, ताकि वे अपने उत्पादों की बिक्री व्यापक स्तर पर कर सकें और बेहतर आय अर्जित कर सकें।

योजना के तहत ऐसे लाभार्थियों को प्रोत्साहित किया जाता है जो मछली और मत्स्य उत्पादों की खरीद-बिक्री के लिए डिजिटल एवं ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित करना चाहते हैं। सरकार द्वारा परियोजना की लागत के आधार पर उचित सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे आधुनिक विपणन व्यवस्था को बढ़ावा मिल सके और मत्स्य क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हों।
योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी के पास परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) होना अनिवार्य है। साथ ही लाभार्थी को यह वचनबद्धता पत्र देना होगा कि ई-प्लेटफॉर्म से जुड़ी सभी परिसंपत्तियों का संचालन, रखरखाव और निगरानी अनुदान प्राप्त करने के बाद कम से कम पांच वर्षों तक सुनिश्चित की जाएगी। परियोजना प्रस्तावों पर विचार डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) अथवा एससीपी मॉडल के आधार पर किया जाएगा तथा परियोजना का आकार एवं व्यवहार्यता विभाग द्वारा मामले-दर-मामले के आधार पर तय की जाएगी।
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की बिक्री होने से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उत्पादकों को सीधे खरीदारों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल मछली पालकों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी गुणवत्तापूर्ण उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
उन्होंने बताया कि योजना के लिए आवेदन करते समय लाभार्थियों को पहचान प्रमाण के रूप में मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड अथवा अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके अतिरिक्त जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), विभाग और लाभार्थी के बीच अनुबंध पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), बैंक खाते एवं पैन कार्ड का विवरण सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। सभी दस्तावेज विधिवत एवं पूर्ण होने पर ही आवेदन पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के विस्तार से मछली पालन व्यवसाय को नई पहचान मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। योजना का लाभ उठाकर लाभार्थी आधुनिक विपणन तंत्र से जुड़ सकते हैं और अपने व्यवसाय को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकते हैं।

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लेखक✓ Verified Author

Sahab Ram

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