सिरसा, 27 जुलाई।
मेरा युवा भारत के विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम (वीवीवीपी) के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के 250 जिलों के युवाओं से संवाद किया। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का सिरसा के लघु सचिवालय के वीडियो कॉफ्रेंसिंग कक्ष में सीधा प्रसारण किया गया। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त अर्पित संगल, डीआईओ एनआईसी हरीष, माई भारत के जिला युवा अधिकारी धनपत सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में सिरसा से विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड के चमोली जिले के गजकोट, माणा और बामणी गांवों का भ्रमण करने वाली कालांवाली की खुशबु ने भी हिस्सा लिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि सीमांत गांवों में भी जीवन पूरी गति से आगे बढ़ रहा है और सरकार वहां सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सीमांत गांवों का भ्रमण कराने का उद्देश्य उन्हें वहां की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली से परिचित कराना तथा एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को और मजबूत बनाना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि सीमांत क्षेत्रों के लोगों में देशभक्ति की भावना सबसे प्रबल होती है और इस अभियान के माध्यम से युवाओं को नए अनुभवों के साथ-साथ देश को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया का लाभ अब सीमांत गांवों तक पहुंच चुका है और वहां विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित गांव विकसित भारत की आधारशिला है। विकसित भारत के निर्माण की यह यात्रा लगातार चल रही है और इसमें युवा साथियों की बडी भूमिका है। इसलिए जब देश का युवा जमीन से जुडता है तो वह विकसित भारत के विजन को और व्यापक बनाता है। बॉर्डर के गांवों का जीवन कठिन होता है, सीमावर्ती गांवों के लोगों देशभक्ति को पल प्रतिपल जीते हैं। पहले वहां पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव था, लेकिन देशभक्ति की भावना कभी भी कम नहीं हुई हमारी सरकार ने सीमावर्ती गांवों को देश का प्रथम गांव माना है। सरकार ने इन गांवों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई, जिससे उनका जीवन बदल रहा है। हमारी सरकार सीमावर्ती गांवों में टूरिज्म को बहुत प्रोत्साहित कर रही है, युवा सरकार के प्रयासों को विस्तार दे सकते हैं।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि जब भी वे किसी पर्यटन स्थल या यात्रा पर जाएं तो अपने कुल खर्च का कम से कम पांच प्रतिशत स्थानीय लोगों से सामान खरीदने पर अवश्य खर्च करें। इससे स्थानीय लोगों की आजीविका को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। प्रधानमंत्री ने सीमांत गांवों का भ्रमण कर चुके युवाओं से अपने अनुभव साझा करने का आग्रह करते हुए कहा कि भ्रमण से भ्रम दूर होते हैं।
आईटीबीपी कैंप से लेकर स्थानीय संस्कृति तक, विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम ने दिया नया अनुभव : खुशबू
कार्यक्रम के उपरांत कालांवाली निवासी खुशबू ने भी विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत अपने अनुभव साझा किए। खुशबू ने तीन जून से आयोजित सात दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम में उत्तराखंड के चमोली जिले के गजकोट, माणा और बामणी गांवों का दौरा किया।
खुशबू ने बताया कि यह यात्रा उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव रही। उन्हें उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों की संस्कृति, परंपराओं, रहन-सहन, खान-पान, रोजगार के साधनों और ग्राम पंचायतों की कार्यप्रणाली को करीब से जानने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने पूरे भ्रमण के दौरान उनका मार्गदर्शन किया। उन्हें आईटीबीपी कैंप का भ्रमण कराने के साथ-साथ जवानों की कार्यशैली, प्रशिक्षण और सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी भी दी गई। इसके अलावा ट्रैकिंग, स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों के लोगों ने जिस आत्मीयता और अपनत्व से उनका स्वागत किया, वह हमेशा याद रहेगा। इस यात्रा ने उन्हें भारत की विविध संस्कृति और एकता को करीब से समझने का अवसर दिया। खुशबू ने जिले के युवाओं से आह्वान किया कि वे भी माई भारत अभियान से जुडक़र ऐसे अवसरों का लाभ उठाएं, क्योंकि इससे देश को समझने और नए अनुभव प्राप्त करने का अनूठा अवसर मिलता है।
विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से किया संवाद, सिरसा में हुआ सीधा प्रसारण









